Sunday, August 13, 2006

कसाल


कसाल बस स्थानक, कोंकण, महरष्ट्र. अगर कभी यहाँ आए, तो बांदेकर होटल से सोलकडी लेना न भूलें!

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Saturday, June 03, 2006

कोंकण यात्रा


तलेरे (तळेरे) से कुछ मील दूर, पोंडा घाट की ओर। सावन में एक अलग परिचय। Posted by Picasa

Friday, June 02, 2006

ॠषिकेश

गढ़वाल, उत्तरांचल में हिमालय पर्वतों के तल में बसा ॠषिकेश धार्मिक दृष्टि के अतिरिक्त अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए भी प्रसिद्ध है। सुबह सवेरे पहाड़ियों के पीछे से निकलता हुआ सूर्य, गंगा के बहते पानी की कलकल, कोहरे से ढकी पहाड़ी चोटियाँ, यह एक ऐसा अनुभव होता है जिसको मात्र महसूस किया जा सकता है, बयान नहीं।




भोर के समय निकलता हुआ सूर्य अपना प्रकाश चारो ओर बिखेर देता है और उसका सुनहरा रंग गंगा के जल में भी उतर आता है।






गंगा के दूसरे तट पर स्थित मन्दिर और आश्रम आदि।






ॠषिकेश को घेरे खड़े पर्वतों में से एक की चोटी पर स्थित(ॠषिकेश से लगभग 25 किलोमीटर) देवी के शक्तिपीठों में से एक, कुन्जापुरी देवी सिद्ध शक्तिपीठ।



ॠषिकेश यात्रा के अन्य छायाचित्र यहाँ देख सकते हैं। मेरी इस यात्रा का वर्णन मेरे हिन्दी ब्लॉग पर यहाँ उपलब्ध है।

Wednesday, April 26, 2006

दिल्ली हाट के रँग

दिल्ली में आई एन ए मार्किट के सामने, सफ़दरजंग अस्पताल और आल इंडिया इस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंसिस के करीब है "दिल्ली हाट" जहाँ देश भर के लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करने आते रहते हैं. यहाँ के रँग देख कर फोटों खींचे बिना रहा नहीं जाता. आज प्रस्तुत हैं इन्हीं रँगों की एक झलक.